क्या आप हिमालय की तलहटी में बसे एक ऐसे paradise की तलाश में हैं जहां घने जंगल, चाय के बागान, नदियां और वन्य जीवन का अद्भुत संगम हो? तो Dooars आपके लिए परफेक्ट destination है। उत्तरी बंगाल का यह खूबसूरत इलाका न केवल प्रकृति प्रेमियों बल्कि एडवेंचर के शौकीनों और वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर्स के लिए भी स्वर्ग से कम नहीं है। Dooars से 200 किलोमीटर के दायरे में आपको ऐसी जगहें मिलेंगी जो आपकी यात्रा को यादगार बना देंगी। यहां का हर कोना अपनी खासियत रखता है और हर मौसम में अलग रंग दिखाता है।
Dooars क्या है और क्यों खास है
Dooars शब्द का मतलब होता है द्वार या गेटवे। यह इलाका भूटान और असम का प्रवेश द्वार माना जाता है और पूर्वी हिमालय की तलहटी में फैला हुआ है। तीस्ता महानंदा तोरसा और जलढाका जैसी नदियां यहां बहती हैं जो इस क्षेत्र को और भी खूबसूरत बनाती हैं।
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यह क्षेत्र अपने घने जंगलों चाय के बागानों और विविध वन्य जीवन के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यहां एशियाई हाथी एक सींग वाले गैंडे बाघ तेंदुए और 500 से ज्यादा पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती हैं। सिलीगुड़ी से Dooars का सफर शुरू होता है और यहां से 200 किमी के दायरे में अनगिनत खूबसूरत जगहें हैं।
Dooars यात्रा का ओवरव्यू
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| मुख्य गेटवे शहर | सिलीगुड़ी न्यू जलपाईगुड़ी |
| यात्रा दायरा | 200 किलोमीटर के भीतर |
| राज्य | पश्चिम बंगाल |
| कोलकाता से दूरी | लगभग 600 किलोमीटर |
| गुवाहाटी से दूरी | लगभग 400 किलोमीटर |
| बेस्ट सीजन | अक्टूबर से अप्रैल |
| मुख्य आकर्षण | वाइल्डलाइफ चाय बागान नदियां जंगल |
| औसत तापमान | 10 से 25 डिग्री सेल्सियस |
| बजट | 3000 से 8000 रुपये प्रति व्यक्ति प्रतिदिन |
Top 10 Tourist Places in Dooars के भीतर 200 किमी
1. गोरुमारा नेशनल पार्क वाइल्डलाइफ का खजाना

Gorumara National Park Dooars का सबसे प्रसिद्ध और लोकप्रिय राष्ट्रीय उद्यान है जो सिलीगुड़ी से मात्र 85 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह पार्क 80 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है और एशियाई हाथियों के लिए प्रसिद्ध है।
वन्य जीवन और प्राकृतिक सुंदरता
यहां एशियाई हाथी एक सींग वाला गैंडा भारतीय बाइसन तेंदुआ हिरण और सांभर की बड़ी आबादी है। पार्क में 300 से ज्यादा पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती हैं जो बर्ड वॉचर्स के लिए स्वर्ग है।
जंगल सफारी का रोमांच यहां अविस्मरणीय है। सुबह की सफारी में जंगली जानवरों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने का मौका मिलता है। वॉच टावर्स से पूरे जंगल का नजारा देखते ही बनता है।
यात्रा की जानकारी
सिलीगुड़ी से दूरी 85 किलोमीटर है और सड़क मार्ग से 2 से 3 घंटे में पहुंचा जा सकता है। एंट्री फीस भारतीयों के लिए 100 रुपये और विदेशियों के लिए 500 रुपये है। सफारी की बुकिंग ऑनलाइन या ऑनस्पॉट की जा सकती है जिसकी कीमत 300 से 500 रुपये प्रति व्यक्ति है।
2. जलदापाड़ा नेशनल पार्क गैंडों का घर
Jaldapara National Park सिलीगुड़ी से 120 किलोमीटर दूर स्थित एक और शानदार वाइल्डलाइफ डेस्टिनेशन है। यह पार्क 216 वर्ग किलोमीटर में फैला है और खासतौर पर एक सींग वाले गैंडे के लिए मशहूर है।
गैंडों का अभयारण्य
जलदापाड़ा में भारत में एक सींग वाले गैंडों की दूसरी सबसे बड़ी आबादी है। यहां हाथी सफारी का मजा ही अलग है क्योंकि हाथी पर बैठकर जंगल के बीच जाना और गैंडों को करीब से देखना रोमांचकारी अनुभव है।
तोरसा नदी पार्क के बीच से बहती है जो जानवरों के लिए पानी का मुख्य स्रोत है। नदी के किनारे जानवरों को देखने की संभावना बहुत ज्यादा होती है।
सफारी और ठहरने की व्यवस्था

हाथी सफारी की कीमत 500 से 800 रुपये प्रति व्यक्ति है और जीप सफारी 400 से 600 रुपये में उपलब्ध है। पार्क के अंदर फॉरेस्ट लॉज और बाहर कई होटल और रिसॉर्ट्स हैं जो 1500 से 5000 रुपये प्रति रात में मिल जाते हैं।
3. लावा ऑफबीट हिल स्टेशन
Lava सिलीगुड़ी से 95 किलोमीटर दूर 2350 मीटर की ऊंचाई पर स्थित एक खूबसूरत और शांत हिल स्टेशन है। यह जगह उन लोगों के लिए परफेक्ट है जो भीड़भाड़ से दूर प्रकृति की गोद में समय बिताना चाहते हैं।
प्राकृतिक सुंदरता और शांति
लावा घने देवदार के जंगलों से घिरा हुआ है और यहां से कंचनजंघा की बर्फीली चोटियां साफ दिखाई देती हैं। नीहारिका व्यू पॉइंट से सूर्योदय का नजारा अद्भुत होता है जब पहली किरणें बर्फ की चोटियों को सुनहरा बना देती हैं।
लावा मोनेस्ट्री यहां का मुख्य आकर्षण है जहां का शांत वातावरण मन को सुकून देता है। बर्ड वॉचिंग के लिए यह जगह स्वर्ग है क्योंकि यहां दुर्लभ पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं।
ट्रेकिंग और एडवेंचर
लावा से रचेला पास तक की ट्रेकिंग बहुत लोकप्रिय है। जंगल के बीच से गुजरता यह ट्रेक नेचर लवर्स के लिए परफेक्ट है। स्थानीय गाइड की मदद से आप छिपे हुए झरनों तक भी पहुंच सकते हैं।
4. लोलेगांव क्लाउड्स का गांव
सिलीगुड़ी से 100 किलोमीटर दूर Lolegaon एक छोटा सा खूबसूरत गांव है जो 1675 मीटर की ऊंचाई पर बादलों के बीच बसा है। यह Dooars के सबसे खूबसूरत ऑफबीट डेस्टिनेशन्स में से एक है।
कैनोपी वॉक और व्यू पॉइंट्स
लोलेगांव का मुख्य आकर्षण कैनोपी वॉक है जो पेड़ों के ऊपर बना 180 मीटर लंबा झूलता पुल है। इस पुल पर चलना अपने आप में एक रोमांचक अनुभव है और ऊपर से जंगल का नजारा माइंड ब्लोइंग है।
चांगे फॉल्स यहां से 5 किलोमीटर दूर एक खूबसूरत झरना है जहां ट्रेकिंग करके पहुंचा जा सकता है। कंचनजंघा व्यू पॉइंट से हिमालय की चोटियों का पैनोरमिक व्यू दिखता है।
होमस्टे का अनुभव
लोलेगांव में होमस्टे की संस्कृति बहुत मजबूत है। स्थानीय लोगों के साथ रहना और उनकी संस्कृति को जानना एक अलग अनुभव है। होमस्टे 800 से 1500 रुपये प्रति रात में मिल जाते हैं जिसमें खाना भी शामिल होता है।
5. सुंटालेखोला नदी किनारे का स्वर्ग
Suntalekhola सिलीगुड़ी से 65 किलोमीटर दूर सुंटाली नदी के किनारे बसा एक छोटा सा खूबसूरत गांव है। यह जगह एडवेंचर और प्रकृति प्रेमियों के लिए आदर्श है।
नदी और जंगल का संगम
सुंटाली नदी का क्रिस्टल क्लियर पानी और चारों तरफ घने जंगल यहां का मुख्य आकर्षण हैं। नदी में पत्थरों के बीच बैठकर समय बिताना और पानी की आवाज सुनना बेहद सुकून भरा है।
यहां से छोटे छोटे ट्रेक निकलते हैं जो जंगल के बीच से गुजरते हैं। बर्ड वॉचिंग के लिए भी यह जगह बेहतरीन है। रात में नदी के किनारे कैंप फायर का मजा अलग होता है।
एंगलिंग और रिवर एक्टिविटीज
मछली पकड़ने के शौकीनों के लिए यहां परमिट लेकर एंगलिंग की जा सकती है। नदी में पैर डुबोकर बैठना और प्रकृति को महसूस करना यहां की खासियत है।
6. चापरामारी वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी हाथियों का कॉरिडोर

सिलीगुड़ी से 45 किलोमीटर दूर Chapramari Wildlife Sanctuary एक छोटा लेकिन बेहद खूबसूरत अभयारण्य है। यह गोरुमारा और जलदापाड़ा के बीच हाथियों के आवागमन का मुख्य कॉरिडोर है।
वन्य जीवन की विविधता
यहां हाथियों के झुंड आसानी से दिख जाते हैं खासकर शाम के समय। गौर हिरण तेंदुआ और कई पक्षी प्रजातियां भी यहां पाई जाती हैं। मुर्ती नदी अभयारण्य के बीच से बहती है जो जानवरों के लिए पानी का स्रोत है।
वॉच टावर और सफारी
अभयारण्य में तीन वॉच टावर्स हैं जहां से जानवरों को देखा जा सकता है। जीप सफारी भी उपलब्ध है जो 200 से 300 रुपये प्रति व्यक्ति में मिल जाती है। यहां का वातावरण बेहद शांत है और फोटोग्राफी के लिए परफेक्ट है।
7. बक्सा टाइगर रिजर्व बाघों का साम्राज्य
Buxa Tiger Reserve सिलीगुड़ी से 160 किलोमीटर दूर भूटान की सीमा पर स्थित है। यह 760 वर्ग किलोमीटर में फैला एक विशाल टाइगर रिजर्व है जो अपनी जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है।
बाघ और अन्य वन्य जीव
यहां बाघ तेंदुआ क्लाउडेड लेपर्ड हाथी गौर और कई दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं। संखोश नदी रिजर्व के बीच से बहती है और यहां का जंगल बेहद घना है।
ट्रेकिंग और एडवेंचर
बक्सा फोर्ट तक की ट्रेकिंग बहुत लोकप्रिय है। यह पुराना किला अंग्रेजों के समय का है और यहां से चारों तरफ का नजारा शानदार है। रिजर्व में कई ट्रेकिंग रूट्स हैं जो एडवेंचर लवर्स के लिए परफेक्ट हैं।
परमिट और ठहरना
बक्सा में जाने के लिए पहले से परमिट लेना जरूरी है जो आलीपुरद्वार के फॉरेस्ट ऑफिस से मिलता है। यहां फॉरेस्ट बंगलो और कैंप साइट्स उपलब्ध हैं।
8. जयंती भूटान बॉर्डर का गेटवे
सिलीगुड़ी से 180 किलोमीटर दूर Jayanti भूटान की सीमा पर स्थित एक खूबसूरत गांव है। जयंती नदी इस गांव के बीच से बहती है और इसका पानी क्रिस्टल जैसा साफ है।
महाकाल गुफा और मंदिर
यहां का मुख्य आकर्षण महाकाल गुफा है जो एक प्राकृतिक गुफा है और इसके अंदर शिवलिंग स्थापित है। गुफा तक पहुंचने के लिए नदी को पार करना पड़ता है जो अपने आप में रोमांचक है।
जयंती कालीमंदिर यहां का एक और प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। नदी के किनारे बैठकर शांत वातावरण में समय बिताना यहां की खासियत है।
नदी स्नान और पिकनिक
जयंती नदी का पानी इतना साफ है कि आप तल तक देख सकते हैं। यहां नहाना और नदी किनारे पिकनिक मनाना स्थानीय और पर्यटक दोनों पसंद करते हैं।
9. कूच बिहार ऐतिहासिक महलों का शहर

सिलीगुड़ी से 135 किलोमीटर दूर Cooch Behar एक ऐतिहासिक शहर है जो अपने खूबसूरत महलों और मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। यह शहर कभी एक स्वतंत्र रियासत की राजधानी हुआ करता था।
कूच बिहार पैलेस
यह महल 1887 में बनाया गया था और यह लंदन के बकिंघम पैलेस की तर्ज पर बना है। महल की इटालियन वास्तुकला देखते ही बनती है। अंदर म्यूजियम है जहां शाही परिवार की वस्तुएं प्रदर्शित हैं।
मदन मोहन मंदिर
यह 1885 में बना एक खूबसूरत मंदिर है जो अपनी अनोखी वास्तुकला के लिए जाना जाता है। मंदिर में 101 गुंबद हैं और यह भगवान कृष्ण को समर्पित है।
सागर दिघी
यह एक विशाल तालाब है जो शहर के बीचोबीच स्थित है। शाम के समय यहां बोटिंग का मजा लिया जा सकता है और तालाब के किनारे टहलना बेहद सुकून भरा है।
10. भूटान घाट और सकरंती नदी किनारे का सुकून
सिलीगुड़ी से 75 किलोमीटर दूर Bhutanghat तीस्ता और रैढाक नदियों के संगम पर स्थित है। यह जगह नदी प्रेमियों के लिए स्वर्ग है।
नदी संगम की खूबसूरती
दो नदियों का मिलन बिंदु देखने लायक है जहां पानी का रंग अलग अलग होता है। नदी किनारे बैठकर समय बिताना और पानी की आवाज सुनना ध्यान जैसा अनुभव है।
सकरंती का शांत गांव
पास में ही सकरंती गांव है जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। यहां से छोटे ट्रेक निकलते हैं और चाय के बागानों के बीच टहलना बेहद सुखद है।
रिवर राफ्टिंग और एंगलिंग
तीस्ता नदी में राफ्टिंग की सुविधा मौसम के अनुसार उपलब्ध होती है। मछली पकड़ने के शौकीन भी यहां अच्छा समय बिता सकते हैं।
Dooars यात्रा की पूर्ण योजना गाइड
कैसे पहुंचें Dooars
हवाई मार्ग से
बागडोगरा एयरपोर्ट सबसे नजदीकी हवाई अड्डा है जो सिलीगुड़ी से 15 किलोमीटर दूर है। यहां से दिल्ली कोलकाता मुंबई और अन्य बड़े शहरों से रोजाना फ्लाइट्स हैं। एयरपोर्ट से टैक्सी या शेयर्ड कैब मिल जाती है।
रेल मार्ग से
न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशन प्रमुख जंक्शन है जो पूरे देश से जुड़ा हुआ है। यहां से Dooars के सभी जगहों के लिए टैक्सी और बसें मिलती हैं। न्यू अलीपुरद्वार भी एक महत्वपूर्ण स्टेशन है।
सड़क मार्ग से
सिलीगुड़ी से Dooars के सभी जगहों के लिए बस सेवा उपलब्ध है। शेयर्ड सुमो और प्राइवेट टैक्सी भी मिल जाती हैं। खुद की कार या बाइक से ड्राइव करना सबसे बेहतर ऑप्शन है।
बेस्ट टाइम टू विजिट
सर्दियों का मौसम
अक्टूबर से फरवरी का समय सबसे बेहतर है जब मौसम सुहावना रहता है। वाइल्डलाइफ स्पॉटिंग के लिए यह समय परफेक्ट है क्योंकि जानवर ज्यादा दिखते हैं।
गर्मियों का मौसम
मार्च से मई में गर्मी होती है लेकिन पहाड़ी इलाकों में मौसम अच्छा रहता है। यह समय बर्ड वॉचिंग के लिए अच्छा है।
मानसून
जून से सितंबर में बारिश होती है और Dooars अपने सबसे खूबसूरत रूप में होता है। लेकिन कुछ नेशनल पार्क बंद रहते हैं और रास्ते खतरनाक हो सकते हैं।
ठहरने के विकल्प और बजट
होटल और रिसॉर्ट्स
Dooars में हर बजट के होटल मिल जाते हैं। बेसिक होटल 800 से 1500 रुपये प्रति रात में मिलते हैं। मिड रेंज रिसॉर्ट्स 2000 से 4000 रुपये में उपलब्ध हैं। लक्जरी जंगल रिसॉर्ट्स 5000 से 15000 रुपये प्रति रात में मिलते हैं।
होमस्टे
लावा लोलेगांव और सुंटालेखोला में होमस्टे की बेहतरीन सुविधा है। 800 से 1500 रुपये में खाने के साथ ठहरने की व्यवस्था मिल जाती है। स्थानीय संस्कृति को जानने का यह सबसे अच्छा तरीका है।
फॉरेस्ट बंगलो
नेशनल पार्क्स में फॉरेस्ट बंगलो मिलते हैं जो पहले से बुक करने पड़ते हैं। यहां रुकने का अनुभव बिल्कुल अलग है क्योंकि आप जंगल के बीच होते हैं।
खाने पीने की जानकारी
स्थानीय व्यंजन
मोमो थुक्पा और फिंग यहां के लोकप्रिय व्यंजन हैं। बंगाली खाने का भी अच्छा वर्ल्ड मिलता है खासकर मछली करी और चावल। चाय Dooars की पहचान है तो हर जगह ताजा चाय जरूर ट्राई करें।
रेस्टोरेंट्स और ढाबे
छोटे शहरों में लोकल ढाबे मिलते हैं जहां सस्ता और स्वादिष्ट खाना मिलता है। होटलों में भी अच्छे रेस्टोरेंट्स हैं। वीकेंड में भीड़ बढ़ जाती है तो पहले से बुकिंग करें।
सफारी और परमिट की जानकारी
ऑनलाइन बुकिंग
गोरुमारा और जलदापाड़ा की सफारी पहले से ऑनलाइन बुक करना बेहतर है खासकर सीजन में। वेस्ट बंगाल फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की वेबसाइट पर बुकिंग होती है।
ऑनस्पॉट बुकिंग
अगर पहले से बुकिंग नहीं की है तो सुबह जल्दी पहुंचकर काउंटर पर ट्राई कर सकते हैं। लेकिन सीट मिलने की गारंटी नहीं होती।
सफारी के प्रकार
जीप सफारी हाथी सफारी और वॉच टावर विजिट के ऑप्शन होते हैं। हाथी सफारी का अनुभव सबसे अलग है लेकिन थोड़ा महंगा होता है।
यात्रा के लिए जरूरी टिप्स और सुझाव
पैकिंग चेकलिस्ट
सर्दियों में गर्म कपड़े बिल्कुल जरूरी हैं क्योंकि रात में तापमान 5 डिग्री तक गिर जाता है। जूते ट्रेकिंग या चलने के लिए आरामदायक होने चाहिए। टॉर्च या हेडलैंप जरूर रखें क्योंकि कई जगहों पर बिजली की दिक्कत होती है। बायनाकुलर बर्ड वॉचिंग और वाइल्डलाइफ स्पॉटिंग के लिए उपयोगी है। कैमरा अच्छी क्वालिटी का होना चाहिए क्योंकि यहां फोटोग्राफी के शानदार मौके मिलते हैं। पर्सनल मेडिसिन और फर्स्ट एड किट भी साथ रखें।
सुरक्षा और सावधानियां
जंगल में हमेशा गाइड के साथ जाएं और निर्धारित रास्तों पर ही चलें। रात में अकेले बाहर न निकलें खासकर जंगल के नजदीकी इलाकों में। हाथियों का कॉरिडोर है तो शाम के बाद सावधानी बरतें।
प्लास्टिक का इस्तेमाल न करें और कचरा इधर उधर न फेंकें। जंगली जानवरों को खाना न खिलाएं और उन्हें परेशान न करें। फोटोग्राफी के चक्कर में उनके बहुत करीब न जाएं।
मोबाइल नेटवर्क और कनेक्टिविटी
मुख्य शहरों में सभी नेटवर्क काम करते हैं लेकिन दूरदराज के गांवों में सिग्नल कमजोर हो सकता है। BSNL और Jio की कनेक्टिविटी सबसे बेहतर है। जरूरी नंबर पहले से सेव कर लें और ऑफलाइन मैप डाउनलोड कर लें।
लोकल ट्रांसपोर्ट
सिलीगुड़ी से सभी जगहों के लिए शेयर्ड सुमो मिलती हैं जो 100 से 300 रुपये प्रति सीट लेती हैं। प्राइवेट टैक्सी पूरे दिन के लिए 2500 से 4000 रुपये में मिल जाती है। बाइक रेंट पर लेना भी अच्छा ऑप्शन है जो 800 से 1200 रुपये प्रति दिन में मिलती है।
Dooars में फोटोग्राफी के बेस्ट स्पॉट्स
गोरुमारा के वॉच टावर्स से सुबह की पहली रोशनी में जंगल का नजारा फोटोग्राफर्स के लिए ड्रीम लोकेशन है। लावा से कंचनजंघा का व्यू खासकर सूर्योदय के समय माइंड ब्लोइंग होता है। लोलेगांव का कैनोपी वॉक और आसपास के बादल फोटोग्राफी के लिए परफेक्ट सेटिंग हैं।
तीस्ता और तोरसा नदियों के किनारे लैंडस्केप फोटोग्राफी के शानदार मौके मिलते हैं। चाय के बागानों में काम करते मजदूर और उनकी लाइफस्टाइल भी फोटोग्राफी के अच्छे सब्जेक्ट हैं। वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी के लिए टेलीफोटो लेंस जरूरी है।
बजट प्लानिंग – 4 दिन 3 रात की यात्रा
| खर्च का प्रकार | अनुमानित राशि प्रति व्यक्ति |
|---|---|
| ट्रांसपोर्टेशन | 3000 से 5000 रुपये |
| होटल या होमस्टे | 2400 से 4500 रुपये |
| खाना पीना | 2000 से 3000 रुपये |
| सफारी और एंट्री फीस | 1500 से 2500 रुपये |
| लोकल ट्रैवल | 1000 से 1500 रुपये |
| मिसलेनियस और शॉपिंग | 1000 से 1500 रुपये |
| कुल अनुमानित खर्च | 10000 से 18000 रुपये |
Dooars में शॉपिंग – क्या खरीदें
चाय
Dooars की ताजा चाय सबसे अच्छी सौगात है। डार्जिलिंग और असम चाय के बीच का स्वाद यहां की चाय में मिलता है। 200 से 500 रुपये प्रति किलो में अच्छी क्वालिटी मिल जाती है।
हस्तशिल्प
स्थानीय आदिवासी समुदायों द्वारा बनाए गए हस्तशिल्प की वस्तुएं खरीदी जा सकती हैं। बांस के उत्पाद लकड़ी की नक्काशी और पारंपरिक कपड़े यहां की खासियत हैं।
मसाले और जड़ी बूटियां
स्थानीय बाजारों में ताजे मसाले और जड़ी बूटियां मिलती हैं। हनी भी अच्छी क्वालिटी का मिलता है जो 300 से 500 रुपये प्रति किलो है।
Dooars यात्रा के फायदे और ध्यान रखने योग्य बातें
फायदे
- वाइल्डलाइफ स्पॉटिंग का बेहतरीन मौका – हाथी, गैंडे, बाघ और सैकड़ों पक्षी प्रजातियां
- प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर – जंगल, नदियां, पहाड़ और चाय के बागान
- एडवेंचर एक्टिविटीज – ट्रेकिंग, सफारी, रिवर राफ्टिंग और कैंपिंग
- ऑफबीट डेस्टिनेशन – भीड़भाड़ से दूर शांत वातावरण
- कम बजट में भी घूमा जा सकता है – होमस्टे और लोकल ट्रांसपोर्ट सस्ते हैं
- स्थानीय संस्कृति का अनुभव – आदिवासी समुदायों के बीच रहने का मौका
- फोटोग्राफी के लिए स्वर्ग – हर कोना फोटोजेनिक है
- पूरे साल घूमा जा सकता है – हर मौसम की अपनी खासियत
ध्यान रखने योग्य बातें
- मानसून में कुछ रास्ते और पार्क बंद रहते हैं
- सफारी की पहले से बुकिंग जरूरी है, खासकर पीक सीजन में
- कुछ इलाकों में मोबाइल नेटवर्क कमजोर है
- जंगल एरिया है तो हाथियों से सावधानी जरूरी
- एटीएम सभी जगह नहीं मिलते, तो कैश साथ रखें
- रात में ड्राइविंग चुनौतीपूर्ण हो सकती है
- सर्दियों में भारी कोहरा पड़ता है, जो विजिबिलिटी कम कर देता है
निष्कर्ष Dooars में आपका इंतजार है
अगर आप प्रकृति वन्य जीवन और शांति के बीच कुछ दिन बिताना चाहते हैं तो Dooars से बेहतर जगह नहीं हो सकती। यहां के 200 किलोमीटर के दायरे में इतनी विविधता है कि हर तरह के यात्री को कुछ न कुछ जरूर मिल जाएगा।
वाइल्डलाइफ एंथूजिएस्ट्स के लिए नेशनल पार्क्स हैं तो एडवेंचर लवर्स के लिए ट्रेकिंग और राफ्टिंग। शांति चाहने वालों के लिए लावा और लोलेगांव जैसे हिल स्टेशन हैं तो फोटोग्राफर्स के लिए हर जगह परफेक्ट लोकेशन है। परिवार के साथ हो या दोस्तों के साथ सोलो ट्रैवल हो या हनीमून – Dooars हर किसी के लिए कुछ खास रखता है।
अभी प्लानिंग शुरू करें
अगली छुट्टियों का प्लान Dooars का बनाएं और हिमालय की तलहटी में बसे इस खूबसूरत इलाके को एक्सप्लोर करें। सुबह जल्दी उठकर पक्षियों की आवाज सुनें जंगल सफारी में जंगली जानवरों को देखें चाय के बागानों में टहलें और नदी किनारे शांति से बैठें। Dooars की यात्रा एक अनुभव नहीं बल्कि यादों का खजाना बन जाएगी जो जीवन भर साथ रहेगा।




